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चंद्रयान-3 | Chandrayaan-3

 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन | Indian Space Research Organization | ISRO

यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के तहत एक अंतरिक्ष एजेंसी है। इसका मुख्यालय कर्नाटक के बेंगलुरू में स्थित है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान और ग्रहों की खोज को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रोद्योगिकी का उपयोग करना है। 


चंद्रयान-2 मिशन | Chandrayaan-2 Mission

चंद्रयान-2 में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल थे, ये सभी चंद्रमा का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों से लैस थे। ऑर्बिटर का काम 100 किलोमीटर की कक्षा से चंद्रमा की निगरानी करना था जबकि लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। चंद्रयान-2 के रोवर को ‘प्रज्ञान’ नाम दिया गया था। हालाँकि, क्रैश-लैंडिंग के कारण रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक नहीं पहुँच सका था।


चंद्रयान-3| Chandrayaan-3

चंद्रयान -2 के लैंडर और रोवर के नाम भी विक्रम और प्रज्ञान रखे गए थे लेकिन वो मिशन आखिरी क्षणों में खत्म हो गया था, चंद्रयान-3 में इसी नाम को इसी वजह से दोबारा रिपीट किया गया है कि मिशन के सफल होने पर ये दोनों चांद पर अपना काम करें। अब इसरो ने चंद्रयान-3 में ऐसी तकनीक विकसित की है कि ये यान तभी सतह पर उतरेगा, जब उसे उतरने लायक जगह मिले। इसके लिए इसमें अतिरिक्त ईंधन की व्यवस्था भी की गई है। इसे चंद्रमा की सतह पर एक और सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए भेजा गया है। चंद्रयान-3 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचकर उस सतह के संबंध में अध्ययन करना है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इससे पहले किसी और स्पेस एजेंसी ने पहुंचने की हिम्मत नहीं की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा की इस सतह पानी की बर्फ और धूप की प्रचुरता है।


रोवर प्रज्ञान क्या है और क्या करेगा?

लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर रोवर प्रज्ञान को लॉंच करेगा, जो सौर शक्ति से संचालित होगा। ये रोवर 6 पहियों पर चलेगा और 1 सेमी प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ते हुए करीब 500 मीटर की दूरी तय करेगा। रोवर सतह पर केमिकल विश्लेषण को अंजाम देगा और ये डेटा लैंडर को भेजेगा। लैंडर के ज़रिए ये डेटा इसरो के अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचेगा। रोवर प्रज्ञान चंद्रमा के एक दिन या पृथ्वी के हिसाब से 14 दिनों तक सक्रिय रहेगा।


क्या है नामकरण का आधार?

लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है क्योंकि इस संस्कृत शब्द का अर्थ साहस और वीरता से जुड़ा है। यह पहला मौका है, जब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दुनिया की कोई स्पेस एजेंसी अध्ययन के लिए मिशन लॉंच कर रही है। और दूसरी बात ये है कि लैंडर का नाम विक्रम रखने के पीछे एक मकसद वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि देना है। विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रमों का जनक भी कहा जाता है।


वहीं, रोवर के नाम प्रज्ञान का अर्थ बुद्धि और विवेक से जुड़ा है। ये नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि रोवर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उच्च तकनीक इस्तेमाल की गई है, जिसके ज़रिए ये रोवर चंद्रमा की सतह पर केमिकल स्टडी कर डेटा तैयार करेगा। इस इंटेलिजेंस को रेखांकित करने के मकसद से इसे प्रज्ञान नाम दिया गया है।

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